धड़क कर रह गया सीने मैं इक अरमान चाहत का
हमें भी होश था, दिल को इरादा था मोहब्बत का
है देखा आँख ने मेरी, जमीं से आसमाँ मिलते
वहस इस बात पे है, पर ये रिश्ता है नजाकत का
गिरतीं ओस कि बूंदें हैं अक्स-ए-दिल को धुन्धलाती
खुदा दे हमको भी मौका जरा इतनी शिकायत का
निभानी दुश्मनी सीखो, तो जाकर मेरे दिलबर से
लगा कर दिल निभाता है जो हर रिश्ता अदावत का
जरा झांको तो दिल मैं क्या हो तुम , है वाकी और क्या होना
लगा कर घूमते हैं सब मुखोटा सा शराफत का
मैं हर एक घर पे देकर दस्तकें गुजरा हूँ गलियों से
कोई दर मुन्तजिर हो, है ये मुमकिन मेरी आहट का
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