Wednesday, June 12, 2013

अशआर ........

अचानक सामने पा कर कहीं साँसे ना रुक जाएँ
मेरी आँखों से अपना हाथ हटा आहिस्ता आहिस्ता .........



होंट उनके हैं किताबों में लिखी तहरीरों जैसे
ऊँगली रखो तो और पढूँ ....दिल करता है .....



आज हम बिछड़े हैं तो कितने रंगीले हो गए
मेरी आँखे सुर्ख ............तेरे हाथ पीले हो गए ...........



अशआर 

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