क्यूँ तेरी बाट जोहता सा हुआ , मेरे जीवन का सार व्याकुल है ?
किस लिए आज तक निरंतर है , मेरे सीने मैं धडकनों का क्रम ?
किस लिए पीर से नहाई हुई मेरे नयनों की नींद बोझिल है ?
किस लिए विरह के हर इक पल को गूँथ कर गीत मैं बनाता हूँ ?
तुम नही आओगी तो किस भ्रम में , मैं तुम्हे आज तक बुलाता हूँ ?
तुम थे तब मैंने पाये थे , कुछ दिवस हास परिहासों के ॥
तुम थे तब मन ने देखे थे मंजर कुसुमित मधुमासों के
तुम गये , साथ ले गये मेरेमधुमय स्वप्नों का मूर्तिरूप
किस लिए आज तक निरंतर है , मेरे सीने मैं धडकनों का क्रम ?
किस लिए पीर से नहाई हुई मेरे नयनों की नींद बोझिल है ?
किस लिए विरह के हर इक पल को गूँथ कर गीत मैं बनाता हूँ ?
तुम नही आओगी तो किस भ्रम में , मैं तुम्हे आज तक बुलाता हूँ ?
तुम थे तब मैंने पाये थे , कुछ दिवस हास परिहासों के ॥
तुम थे तब मन ने देखे थे मंजर कुसुमित मधुमासों के
तुम गये , साथ ले गये मेरेमधुमय स्वप्नों का मूर्तिरूप
,तुम बिन मेरे उद्धगार हुये संक्षिप्त प्रश्ठ इतिहासों के
मैं खुद ही उन अवशेषों कोसंचित करता हूँ , मिटाता हूँ ,
तुम नहीं आओगी तो किस भ्रम मेंमैं तुम्हे आज़ तक बुलाता हूँ !!
तुम रखो जहाँ निज कुसुम पाँव ,स्थल वह खुशहाली गाये ,
जिस ओर द्रष्टि का कोण फिरे वह वस्तु तुम्हारी हो जाये ,
मैं गीत,गज़ल, के रूपों मेंबस नेह तुम्हारा गाता रहूँ ,
हर पँक्ति प्रणय की श्रद्धा सेबस तुम्हे समर्पित हो जाये ,
भक्त,भगवान,की प्रथा की तरहअपने सम्बन्ध मैं निभाता हूँ
तुम नहीं आओगी , पता है मुझेफिर भी मैं बस तुम्हे बुलाता हूँ !
फिर भी मैं बस तुम्हे बुलाता हूँ !!!!!
मैं खुद ही उन अवशेषों कोसंचित करता हूँ , मिटाता हूँ ,
तुम नहीं आओगी तो किस भ्रम मेंमैं तुम्हे आज़ तक बुलाता हूँ !!
तुम रखो जहाँ निज कुसुम पाँव ,स्थल वह खुशहाली गाये ,
जिस ओर द्रष्टि का कोण फिरे वह वस्तु तुम्हारी हो जाये ,
मैं गीत,गज़ल, के रूपों मेंबस नेह तुम्हारा गाता रहूँ ,
हर पँक्ति प्रणय की श्रद्धा सेबस तुम्हे समर्पित हो जाये ,
भक्त,भगवान,की प्रथा की तरहअपने सम्बन्ध मैं निभाता हूँ
तुम नहीं आओगी , पता है मुझेफिर भी मैं बस तुम्हे बुलाता हूँ !
फिर भी मैं बस तुम्हे बुलाता हूँ !!!!!
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